Pradhan Mantri Swanidhi Yojana भारत में रेहड़ी-पटरी व्यवसाय करोड़ों लोगों की आजीविका का महत्वपूर्ण स्रोत है। ये स्ट्रीट वेंडर्स हमारे शहरी जीवन का अभिन्न अंग हैं, जो हमें दैनिक आवश्यकताओं से लेकर विशेष वस्तुओं तक आसानी से उपलब्ध कराते हैं।
परंतु कोविड-19 महामारी ने इन छोटे व्यवसायियों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाला और उनकी आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने जून 2020 में ‘प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि’ (पीएम स्वनिधि) योजना की शुरुआत की।
कोविड-19 महामारी का स्ट्रीट वेंडर्स पर प्रभाव
कोरोनावायरस महामारी और उसके परिणामस्वरूप लगाए गए लॉकडाउन ने स्ट्रीट वेंडर्स को सबसे अधिक प्रभावित किया। सड़कों पर आवागमन पर प्रतिबंध और सामाजिक दूरी के नियमों के कारण इन्हें अपना रोजगार बंद करना पड़ा। बिना नियमित आय के, इन परिवारों के सामने भोजन, आवास और अन्य मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने की गंभीर समस्या उत्पन्न हुई।
एक अनुमान के अनुसार, भारत में लगभग 1 करोड़ स्ट्रीट वेंडर्स हैं, जिनमें ठेला चलाने वाले, फेरीवाले, सब्जी-फल विक्रेता, खाद्य पदार्थ बेचने वाले और कई अन्य प्रकार के विक्रेता शामिल हैं। इनमें से अधिकांश लोग दैनिक कमाई पर निर्भर करते हैं और महामारी के दौरान उनके पास बचत का अभाव था।
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का परिचय
इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए सरकार ने ‘प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना’ शुरू की। इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्ट्रीट वेंडर्स को रियायती दरों पर कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराना है, जिससे वे अपने व्यवसाय को पुनः आरंभ कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।
योजना के अंतर्गत मिलने वाले लाभ
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को निम्नलिखित लाभ प्रदान किए जाते हैं:
- चरणबद्ध वित्तीय सहायता: इस योजना के अंतर्गत स्ट्रीट वेंडर्स को प्रारंभिक चरण में 10,000 रुपये का ऋण प्रदान किया जाता है। समय पर भुगतान करने वाले लाभार्थियों को अगले चरण में 20,000 रुपये और तीसरे चरण में 50,000 रुपये तक का ऋण प्राप्त करने की पात्रता होती है।
- ब्याज सब्सिडी: इस योजना के तहत 7% तक की ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाती है, जिससे लाभार्थियों पर वित्तीय बोझ कम होता है।
- डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहन: योजना के अंतर्गत डिजिटल भुगतान करने वाले स्ट्रीट वेंडर्स को प्रति माह 100 रुपये तक का कैशबैक प्रोत्साहन दिया जाता है।
- बिना गारंटी के ऋण: योजना में बिना किसी संपार्श्विक प्रतिभूति (कोलैटरल) के ऋण प्रदान किया जाता है, जिससे सभी पात्र स्ट्रीट वेंडर्स लाभ उठा सकते हैं।
पात्रता मानदंड
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित पात्रता मानदंड निर्धारित किए गए हैं:
- रेहड़ी-पटरी व्यवसाय: आवेदक को रेहड़ी-पटरी पर व्यवसाय करना चाहिए, जैसे ठेला चलाना, फेरी लगाना, सड़क किनारे दुकान लगाना आदि।
- पहचान प्रमाण: स्ट्रीट वेंडर्स के पास शहरी स्थानीय निकायों (ULB) द्वारा जारी वेंडिंग प्रमाणपत्र या पहचान पत्र होना चाहिए।
- वैकल्पिक मानदंड: यदि किसी स्ट्रीट वेंडर के पास वेंडिंग प्रमाणपत्र नहीं है, तो निम्नलिखित श्रेणियों के तहत भी पात्रता हो सकती है:
- सर्वेक्षण में पहचाने गए स्ट्रीट वेंडर्स, जिन्हें अभी तक प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया है
- यूएलबी या टाउन वेंडिंग कमेटी (टीवीसी) द्वारा अनुशंसा पत्र (LOAR) प्राप्त विक्रेता
- ग्रामीण या उप-शहरी क्षेत्रों में कार्यरत स्ट्रीट वेंडर्स, जिन्हें स्थानीय निकायों द्वारा अनुशंसित किया गया है
आवश्यक दस्तावेज
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के लिए आवेदन करते समय निम्नलिखित दस्तावेज आवश्यक हैं:
- आधार कार्ड
- पैन कार्ड (यदि उपलब्ध हो)
- वेंडिंग प्रमाणपत्र या पहचान पत्र
- बैंक खाता विवरण (पासबुक की प्रति)
- निवास प्रमाण पत्र
- पासपोर्ट साइज फोटो
- आय प्रमाण (यदि उपलब्ध हो)
आवेदन प्रक्रिया
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया सरल है और निम्नलिखित चरणों में पूरी की जा सकती है:
- ऑनलाइन आवेदन: पीएम स्वनिधि की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर “अप्लाई फॉर लोन” विकल्प का चयन करें।
- मोबाइल नंबर और ओटीपी वेरिफिकेशन: अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें और ओटीपी के माध्यम से सत्यापन करें।
- आवेदन फॉर्म भरना: सभी आवश्यक जानकारी और व्यक्तिगत विवरण भरें।
- दस्तावेज अपलोड: सभी आवश्यक दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपलोड करें।
- फॉर्म जमा करना: सभी विवरण जांचने के बाद फॉर्म जमा करें और प्रिंटआउट लें।
- बैंक में आवेदन जमा करना: प्रिंटआउट और दस्तावेजों के साथ नजदीकी बैंक में जाकर आवेदन जमा करें।
- मंजूरी और वितरण: बैंक द्वारा आवेदन की जांच और मंजूरी के बाद, ऋण राशि सीधे लाभार्थी के खाते में स्थानांतरित कर दी जाएगी।
योजना का प्रभाव और उपलब्धियां
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना ने देश भर के स्ट्रीट वेंडर्स के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब तक 50 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को इस योजना के माध्यम से लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं:
- आर्थिक पुनरुत्थान: कोविड-19 के दौरान आर्थिक रूप से प्रभावित स्ट्रीट वेंडर्स को अपना व्यवसाय पुनः आरंभ करने में मदद मिली है।
- औपचारिक वित्तीय प्रणाली में समावेशन: इस योजना ने स्ट्रीट वेंडर्स को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने में मदद की है, जिससे उन्हें साहूकारों और अनौपचारिक ऋणदाताओं के शोषण से बचाया जा सकता है।
- डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा: कैशबैक प्रोत्साहन के माध्यम से स्ट्रीट वेंडर्स को डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रेरित किया गया है, जिससे डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला है।
- स्व-रोजगार को प्रोत्साहन: योजना ने स्व-रोजगार को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में योगदान दिया है।
चुनौतियां और सुझाव
हालांकि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना ने स्ट्रीट वेंडर्स के लिए कई अवसर प्रदान किए हैं, फिर भी कुछ चुनौतियां हैं जिन्हें संबोधित करने की आवश्यकता है:
- जागरूकता की कमी: कई स्ट्रीट वेंडर्स अभी भी इस योजना के बारे में जागरूक नहीं हैं। अधिक प्रचार और जागरूकता अभियानों की आवश्यकता है।
- दस्तावेजीकरण की समस्या: कई स्ट्रीट वेंडर्स के पास आवश्यक दस्तावेज नहीं होते, जिससे आवेदन प्रक्रिया में बाधा आती है। इस संबंध में अधिक सहायता और सरलीकरण की आवश्यकता है।
- ऋण की पर्याप्तता: कुछ स्ट्रीट वेंडर्स के लिए 10,000 रुपये का प्रारंभिक ऋण अपर्याप्त हो सकता है, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जिन्हें अपने व्यवसाय को पूरी तरह से पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है।
- डिजिटल साक्षरता: कई स्ट्रीट वेंडर्स डिजिटल रूप से साक्षर नहीं हैं, जिससे ऑनलाइन आवेदन और डिजिटल भुगतान अपनाने में चुनौतियां आती हैं।
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना स्ट्रीट वेंडर्स के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान करती है, बल्कि उन्हें औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनने और अपनी आजीविका को सुरक्षित करने में भी मदद करती है। कोविड-19 महामारी के बाद के पुनर्निर्माण में इस योजना की भूमिका महत्वपूर्ण है, और इसे अधिक प्रभावी बनाने के लिए निरंतर सुधार और विस्तार की आवश्यकता है।
स्ट्रीट वेंडिंग भारतीय शहरी अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न हिस्सा है, और प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना इस क्षेत्र को मान्यता और समर्थन प्रदान करके शहरी गरीबों के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। यह योजना आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है और समावेशी विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक है।